
गुनगुनालो ऐप: जहाँ संगीत, शब्द और रचनात्मक आज़ादी को मिलती है नई पहचान
कलाकारों के लिए बना,
भारतीय संगीत की दुनिया में लंबे समय से एक खालीपन महसूस किया जा रहा था—एक ऐसा मंच जहाँ कलाकार अपने दिल की बात, अनकहे जज़्बात और मनचाही रचनाएँ बिना किसी बंधन के पेश कर सके। फिल्म, प्रोजेक्ट या मार्केटिंग की मजबूरियों से दूर, “मुझे ऐसा ही गाना है”, “ये मेरी कविता है” जैसी अंदर की आवाज़ को सही जगह मिले—इसी सोच से गुनगुनालो ऐप का जन्म हुआ।

🎼 रचनात्मक आज़ादी का सच्चा मंच
आमतौर पर गायक, संगीतकार या कवि किसी फिल्म या प्रोजेक्ट की ज़रूरत के हिसाब से काम करते हैं। लेकिन हर कलाकार के दिल में कुछ ऐसी रचनाएँ होती हैं, जो सिर्फ आत्मिक संतोष के लिए होती हैं—कभी सिर्फ पियानो और चेलो के साथ एक ग़ज़ल, तो कभी शब्दों की खामोशी में गूंजती कविता। गुनगुनालो ऐसा प्लेटफॉर्म है जहाँ “क्या गाना है?” ये सवाल कोई और नहीं, बल्कि खुद कलाकार तय करता है।
🤝 आर्टिस्ट-ओन्ड प्लेटफॉर्म: मालिक भी कलाकार ही
गुनगुनालो की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ कलाकार सिर्फ कंटेंट क्रिएटर नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म का मालिक भी है। कई जाने-माने गायक, संगीतकार और कवि “आर्टिस्ट इन्वेस्टर” के रूप में इससे जुड़े हुए हैं। हर रचना को लगभग नौ अलग-अलग कमाई के साधन मिलते हैं और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है। यहाँ बड़े म्यूज़िक लेबल्स की प्राथमिकताएँ या प्रमोशन की अनिश्चितता नहीं—क्योंकि यहाँ ताकत कलाकार के हाथ में है।
🚀 यूनिक फीचर्स और ज़िंदा इकोसिस्टम
गुनगुनालो सिर्फ गानों तक सीमित नहीं है। यहाँ लॉसलैस ऑडियो क्वालिटी, प्राइवेट ड्रॉप्स, अर्ली एक्सेस और “गेट क्रैश” जैसे लाइव इंटरैक्शन फीचर्स के ज़रिये कलाकार सीधे अपने श्रोताओं से जुड़ सकता है।

इसके अलावा—मास्टर क्लासेस, पॉडकास्ट, लाइव शोज़, टिकट बुकिंग, स्ट्रीमिंग और खास Gungunalo Poetry सेक्शन—जहाँ कविता को वो मंच मिला है, जो भारत में पहले कभी नहीं था।

🌱 एक ऐप नहीं, एक सोच
गुनगुनालो सिर्फ फीचर्स का कलेक्शन नहीं है—यह एक ज़िंदा इकोसिस्टम है। संगीत, शब्द और कम्युनिटी का संगम। कलाकारों के लिए भी, और उन श्रोताओं के लिए भी, जो आज भी मानते हैं कि संगीत मायने रखता है।

