हिम एक्सप्रेस न्यूज़।
आज मंगलवार के पावन अवसर पर हम आपको रामायण काल की एक ऐसी प्रेरणादायक कथा से रूबरू करा रहे हैं, जो भगवान हनुमान जी के अद्भुत साहस, बुद्धिमत्ता और प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति का प्रतीक है।


रामायण के युद्ध में जब मेघनाद के प्रहार से लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए, तब भगवान श्रीराम अत्यंत व्याकुल हो उठे। वैद्य सुषेण ने लक्ष्मण जी के उपचार के लिए हिमालय के द्रोणगिरि पर्वत से संजीवनी बूटी लाने का उपाय बताया।
समय बहुत कम था। ऐसे कठिन समय में पवनपुत्र हनुमान जी ने अद्भुत साहस का परिचय दिया। वे संजीवनी बूटी की पहचान नहीं कर पाए, तो पूरा पर्वत ही उठाकर युद्धभूमि में ले आए।
हनुमान जी की इस असाधारण सेवा से लक्ष्मण जी के उपचार का मार्ग प्रशस्त हुआ और रामायण की कथा में उनका यह पराक्रम अमर हो गया।
यह प्रसंग हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं होती, बल्कि संकट के समय निस्वार्थ सेवा, साहस और कर्तव्य निभाने में भी दिखाई देती है।
इसीलिए हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है और उनकी भक्ति आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरणा देती है।
जय श्रीराम! 🚩


