भारतीय प्राच्य विद्या सोसायटी के अधिवेशन के माध्यम से सामने लाएंगे वास्तविक तथ्य
सनातन धर्म और प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े तथ्यों को सामने रखेगा पतंजलि: स्वामी रामदेव
29 अक्टूबर से भारतीय प्राच्य विद्या परिषद का 104वां अधिवेशन होगा शुरू, राज्यपाल करेंगे शुभारंभ
हरिद्वार, 28 अक्टूबर। योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि सनातन धर्म की छवि को प्रभावित करने वाले धार्मिक ग्रंथों के कथित गलत चित्रण और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किए जाने के मामलों पर तथ्यात्मक चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि भगवान शिव, भगवान राम, माता सीता और भगवान श्रीकृष्ण सहित देवी-देवताओं से जुड़े प्रसंगों को उनके वास्तविक संदर्भों में समझना आवश्यक है।
कनखल स्थित दिव्य योग मंदिर में आयोजित प्रेसवार्ता में स्वामी रामदेव ने बताया कि पतंजलि की ओर से 29 अक्टूबर से भारतीय प्राच्य विद्या परिषद का तीन दिवसीय 104वां अधिवेशन आयोजित किया जा रहा है। इसमें प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, धर्मशास्त्रों, पुराणों और सनातन धर्म से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। उन्होंने बताया कि अधिवेशन का शुभारंभ उत्तराखंड के राज्यपाल करेंगे। इसमें शंकराचार्य, शीर्ष धर्माचार्य और देश-विदेश के विद्वान भाग लेंगे।
स्वामी रामदेव ने आरोप लगाया कि कुछ लोग धर्मशास्त्रों और पुराणों के संदर्भों में बदलाव कर भ्रामक तरीके से तथ्यों को प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे सनातन धर्म की मान्यताओं और आराध्य देवी-देवताओं की छवि प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों और प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों पर तथ्यों एवं प्रमाणों के आधार पर विमर्श होना चाहिए। आस्था से जुड़े विषयों को लेकर भ्रम फैलाने के बजाय उनके वास्तविक संदर्भों को समझना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि इतिहास में आपसी भेदभाव और विभाजन का लाभ उठाकर विदेशी शक्तियों ने भारत को नुकसान पहुंचाया। स्वामी रामदेव ने सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के विरुद्ध कथित षड्यंत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों को तथ्यों के आधार पर उजागर किया जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ ताकतें सनातन धर्म को मानने वाले लोगों को ईसाई और मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इन दावों और गतिविधियों की वास्तविकता सामने लाने की आवश्यकता है।
स्वामी रामदेव ने कहा कि सत्य सबसे बड़ा धर्म है और सनातन धर्म की परंपराओं से जुड़े विषयों पर प्रमाण आधारित संवाद होना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारतीय प्राच्य विद्या परिषद का अधिवेशन प्राचीन भारतीय ज्ञान, धर्मशास्त्रों और सनातन परंपराओं से संबंधित तथ्यों को सामने रखने के साथ विभिन्न दावों की पड़ताल करने का अवसर प्रदान करेगा।
प्रेसवार्ता में पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण भी मौजूद रहे।




