दीपावली क्यों मनाते हैं? क्या सिर्फ दीप जलाना ही दीपावली है?
सादर

आज दीपावली का पावन पर्व है। चारों ओर दीपों की रोशनी है, घरों में सजावट है, बाजारों में रौनक है और हर तरफ खुशियों का माहौल है।

लेकिन आज हमें एक सवाल खुद से जरूर पूछना चाहिए कि आखिर दीपावली मनाने का वास्तविक उद्देश्य क्या है?
दीपावली केवल दीप जलाने, मिठाइयां बांटने और पटाखे चलाने का त्योहार नहीं है। इसका वास्तविक संदेश है—अंधकार से प्रकाश की ओर, अज्ञान से ज्ञान की ओर और बुराई से अच्छाई की ओर बढ़ना।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा करके और रावण पर विजय प्राप्त करके जब अयोध्या लौटे थे, तब अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। यह पर्व हमें सत्य, मर्यादा, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
मां लक्ष्मी की पूजा हमें केवल धन प्राप्ति ही नहीं, बल्कि धन का सदुपयोग, परिश्रम, ईमानदारी और समृद्धि का महत्व भी समझाती है।
लेकिन आज हमें यह भी विचार करना होगा कि क्या हमारे घर में दीप जल रहे हैं, लेकिन किसी के जीवन में अंधेरा तो नहीं है?
क्या हमने किसी गरीब की मदद की? क्या हमने किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाई? क्या हमने अपने परिवार, पड़ोस और समाज में प्रेम और भाईचारे का दीप जलाया?

याद रखिए, असली दीपावली तब है जब किसी गरीब के घर में भी खुशियों का दीप जले, किसी दुखी इंसान के जीवन में उम्मीद की रोशनी आए और समाज से नफरत, भेदभाव तथा बुराइयों का अंधकार दूर हो।
इस दीपावली पर संकल्प लें कि हम पर्यावरण का ध्यान रखेंगे, जरूरतमंदों की सहायता करेंगे, आपसी मतभेद भुलाकर प्रेम और सद्भाव के साथ रहेंगे।
क्योंकि दीपावली का असली अर्थ घर को रोशन करना ही नहीं, बल्कि किसी के जीवन में उजाला करना भी है
शुभ दीपावली!
Him Express News


